इश्क तेरी चुनरी की तरह धानी तो नहीं ।
दिल मेरा दिल है कोई राजधानी तो नहीं ।।
है मोहब्बत भी अजीब एहसास की तरह ,
रस्ते में गिरा हर फूल अगवानी तो नहीं ।।
गली टेढ़ी भी है और सकरी भी इश्क की ,
चल सम्हल के तू अभी सयानी तो नहीं ।।
दुनिया में बेशक कीमती चीजें बहुत हैं पर ,
गिरा जो अभी वो आँखों का पानी तो नहीं ।।
चर्चा तो हर तरफ उसी की होती रहती है ,
कहीं ये वो राधे कृष्ण की कहानी तो नहीं ।।
हरेक उम्र में होती हैं वो सारी बातें “पंकज” ,
देखना बीत रही उम्र कहीं जवानी तो नहीं ।।